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इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° को सरà¥à¤œà¤°à¥€ की मदद से निकालना पड़ता है। रेडिकल सिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤•à¥à¤Ÿà¥‹à¤®à¥€ करने के बाद पहले या बाद में कीमोथेरेपी की जा सकती है। इसके बाद यूरिन से बाहर निकालने के लिठà¤à¤• रासà¥à¤¤à¤¾ बनाया जाता है। इसके साथ ही कीमोथेरेपी और रेडिà¤à¤¶à¤¨ थेरेपी का उपयोग à¤à¥€ इसमें किया जाता है।
बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° कैंसर के इलाज में सबसे यह सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ किया जाता है कि कैंसर शरीर के और à¤à¤¾à¤—ों में फैला न हो। यदि कैंसर अनà¥à¤¯ जगहों पर फैल गया है तो हमें उसकी सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œà¤¿à¤‚ग के आधार पर इलाज शà¥à¤°à¥‚ करना है। बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° के कैंसर दो तरीके से वरà¥à¤—ीकृत किठहैं, à¤à¤• नॉन मसल इनवेसिव बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° कैंसर और मसल इनवेसिव बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° कैंसर। नॉन मसल इनवेसिव बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° कैंसर के बारे में अगर बात करें तो इसमें बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° के अंदर à¤à¤‚डोसà¥à¤•ोपी रिसेकà¥à¤¶à¤¨ किया जाता है। जिसे हम टीयूआर बीडी कहते हैं। उसके बाद बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° में दवा डाली जाती है और हर तीन महीने में सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤¸à¥à¤•ॉपी की जाती है। मसल इनवेसिव बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° कैंसर काफी घातक होता है। इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° को सरà¥à¤œà¤°à¥€ की मदद से निकालना पड़ता है। रेडिकल सिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤•à¥à¤Ÿà¥‹à¤®à¥€ करने के बाद पहले या बाद में कीमोथेरेपी की जा सकती है। इसके बाद यूरिन से बाहर निकालने के लिठà¤à¤• रासà¥à¤¤à¤¾ बनाया जाता है। इसके साथ ही कीमोथेरेपी और रेडिà¤à¤¶à¤¨ थेरेपी का उपयोग à¤à¥€ इसमें किया जाता है। इसके उपचार में रोबोटिक सरà¥à¤œà¤°à¥€ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² à¤à¥€ बढ़ रहा है।
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